नरम कुरकुरी, नाजुक काया
जोर से दबाया तो बिखर जाता
मुझ बिन अधूरा खाना कहलाता
पापड़. पूरी चपाती कचोड़ी
नाक को पकड़कर
खींचता है कान
कोई उसे कुछ नही कहता
बताओ उसका नाम
चश्मा. डॉक्टर कुत्ता अध्यापक
हरा घेरा, पिला मकान
उसमें रहते, काले इंसान
तरबुज नारियल सरसों. आम
गोल गोल है मेरी काया
हर नारी का रूप सजाया
कांच है मेरे अंग अंग में
मिलती हूं मैं हर एक रंग में
झुमका अंगूठी पायल चूड़ी.
तीन अक्षर का मेरा नाम
आदि कटे तो बने चार
अंत कटे तो ना मैं जानू
बोलो करके सोच विचार
अनार अचार. विचार सदाचार
तीन पैर की चंपा रानी
सुबह सवेरे न्हाय
दाल चावल को छोड़कर
कच्ची रोटी खाए
दही चक्की चकला बेलन. बिल्ली
काले वन की रानी है
लाल पानी पीती है
जूं. बिच्छू मकड़ी बिल्ली
दो अक्षर का मेरा नाम
कच्ची कली मसाला कहलावे
दक्षिण भारत मेरा निवास
औषध का वृक्ष है खास
लोंग. मिर्च इमली हींग
न सीखा संगीत कहीं पर
न सीखा कोई गीत
लेकिन इसकी वाणी में
भरा हुआ संगीत
चक्की कोयल. रेलगाड़ी पायल
एक नारी के दो है बालक
दोनों एक ही रंग
पहला चले, दूसरा सोवे
फिर भी दोनों संग
ताला - चाबी रेलगाड़ी चक्की. बिल्ली
मुजे सुनाती सबकी नानी
प्रथम कटे तो होती हानि
बच्चे भूलते खाना पानी
एक था राजा, एक थी रानी
कहानी. किताब गाना संगीत
जितना आप आगे बढ़ाते है
उतने पीछे छूट जाते है
धुन कदम. रेलगाड़ी पैसे
जाने कहां किधर से आता
फिर न जाने कहाँ छिप जाता
आसमान में दिखाई पड़ता
सात रंग से रखता नाता
इंद्रधनुष. सूरज चांद तारे
उछले कूदे दौड़े दिनभर
दिखने में बड़ा ही सुंदर
लेकिन नही ये भालू बंदर
अपनी धुन में मस्त कलंदर
बंदर हिरन. खरगोश कंगारू
बारह घोड़े
तीस गाड़ी
तीनसौ पैंसठ
करे सवारी
क्रिकेट कैलेंडर. दिन-रात तबेला
बिना तेल के जलता है
बिना पैर वो चलता है
उजियारे को बखैर कर
अंधियारे को दूर करता है
लौ दिया सूरज. मोमबत्ती
अंत कटे तो कौआ बन जाए
प्रथम कटे तो दूरी का माप
मध्य कटे तो कार्य बने
तीन अक्षर का मेरा नाम
किताब मेंढक कागज. कम्प्यूटर
बिजली खाऊं, बटन दबवाउँ
यंत्रो का हूं मैं नेता
काज गणित लेखन का
पल में सब कर देता
कम्प्यूटर किताब अध्यापक केल्क्युलेटर
एक नगरी में चौसठ घर
दो पास बैठे भर चाव
उस नगरी का यही स्वभाव
कटे मरे लगे न घाव
लूडो कैरमबोर्ड शतरंज. कबड्डी
तीन अक्षर का मेरा नाम
लंबी चौड़ी मेरी सतह
मुझ पे चलते वाहन अनेक
जल का हूं मैं बड़ा भंडार
नदी सागर. झरना बादल
एक गुफा में बत्तीस चोर
दिनभर करते काम
रात को करते आराम
कोई बताएगा उसका नाम
दांत. कैरम शतरंज हॉकी
तीन अक्षर का मेरा नाम
लंबा चौड़ा पर न पाश
आदि कटे कहलाता काश
पनाश आकाश. प्रकाश नक्शा
नदी है पर पानी नही
जंगल है पर प्राणी नही
शहर है पर इंसान नही
बताओ ये कौन है
सागर ब्लैकबोर्ड नक्शा. आकाश
आदि कटे तो कीमत बने
मध्य कटे तो बाम
मूंगफली काजू बादाम. अदरक
बीहड़ में राज है जमता
महफ़िल में रौनक भी लाता
देख के कहते भई वाह
देख के भागे उल्टे राह
शेर. ताड़ कछुआ मछली
एक टांग पर खड़ा रहता हूं
एक जगह अड़ा रहता हूं
भारी छाता मैंने है ताना
नाम बताओ पोते-नाना
तीतर पेड़. आकाश छाता
गर्मी में आता हूं काम
मिट्टी की काया से बना मैं
बिना खाये बिजली को
पानी को करता हूं ठंडा
पंखा रेफ्रिजरेटर घड़ा. बर्फ
काली है पर कौआ नही
लंबी है पर नाग नही
बांधते है पर डोर नही
बताओ मेरा नाम
सड़क चोटी. कोयल तार
धूप देख आ जाऊं
छाया देख शरमा जाऊं
हवा करे मुझे स्पर्श
उसमें मैं समा जाऊं
बर्फ पसीना. पंखा परछाई
गजब है ये जादू का डंडा
बिना तेल-बाती रौशनी देता
बटन दबाओ तो तुरंत उठता
पलभर में उजाले को फैला देता
टोर्च. चांद जुगनू लालटेन
स्थिर है लेकिन
दिन-रात चले
बताओ क्या ?
चांद सड़क. नदी समय
चालू करो तो घर चमकाउं
वार करूं तो ले लूं जान
जंगल को मंगल करूं
ना होऊं तो शहर हो वीरान
झाड़ू घड़ी बिजली. सड़क
अंदर लाल मकान
बाहर हरा चोर
गर्मी में दिखता
सर्दी में गायब होता
पसीना नारियल तरबूज. परछाई
एक राजा की
अनोखी रानी
पूंछ डुबोकर
पीती पानी
बिजली नदी दिया. परछाई
पैर नही पर
चलती रहती
दोनों हाथ से अपने
मुंह को पोंछती रहती
घड़ी. सड़क चक्की पंखा
आना जाना उसको भाए
जहां जाए लकड़ी तोड़ आए
है कोई जो नाम बताए
चाकू आरी. अतिथि झाड़ू
जल से भरा एक मटका
बहोत उपर वो है लटका
पी लो पानी है मीठा
जरा भी नही है खट्टा
गुब्बारा संतरा नारियल. पपीता
आंखे मेरी दो चार
कोट मेरे बिन बेकार
मेरी आँखों मे धागा
दर्जी की दुकान से मैं भागा
सुई बटन. सिलाई मशीन कैंची
रोशनी में सामने आऊं
अंधेरे में भाग जाऊं
बिल्ली जुगनू परछाई. सूरज
पैन नही पर लिखता हूं
गाड़ी नही पर चलता हूं
की-बोर्ड. पैंसिल ब्लैकबोर्ड जहाज
बिन बजाकर पीती खून
कमर पतली पैर भी पतले
बैंड-बाजा शहनाई बांसुरी मच्छर.
दो किसान लड़ते जाए
उसकी खेती बढ़ती जाए
मूछें दाढ़ी स्वेटर की बुनाई. साइकिल
स्वाद से कड़वा कर्म से मीठा
गर्मी में देता शीतल छाया
कई बीमारी को दूर भगाए
बताओ क्या ?
नीम. सच झूठ जीभ
रात को जाना
सुबह को आना
तुम्हें सुलाना
बताओ क्या ?
सूरज हवा रात. कहानी
रोज चढ़ता
रोज उतरता
आने से उजाला
जाने से अंधेरा
रात सूरज. चांद जुगनू
सर्दी में आती काम
सिर कान को आपके
ठंड से बचाती बैठ के
सूरज टोपी. दस्ताना स्वेटर
गोल गोल पिला पिला
दूसरों की थाली में लगता बड़ा
संतरा टमाटर तरबूज लड्डू.
कई कपड़ो के पार हुई
एक नही सौ बार हुई
फिर भी ना बेकार हुई
और तेज मेरी धार हुई
सुई. धागा तलवार कैंची
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